Emotionally Speaking



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A Hindi Poem Against the Use of Polybags

This is a short Hindi Poem against the use of Poly bags by JNU student Raghib Akhtar : ‘a poem for children against the use of poly bags’. This is a sweet Hindi poem and will be useful for school children and others looking for Hindi poems and messages on not using the polythene and how non-biodegradable plastics are dangerous, saving the environment and on keeping the earth neat and clean. A cute Hindi poem with a great social message! The poem is very lyrical and is also like a Hindi song.

टक बक टक बक ता ता थय्या
पोली बैग को ना ना भैया!
टक बक टक बक ता ता थय्या
पोली बैग को ना ना भैया!

लेकिन क्यूँ?

पोली बैग जो खाएगी तो गाय मर जायेगी
मम्मी दूध हमारे घर में कहाँ से  फिर लाएगी
गलियों में पानी होगा जब गटर बंद हो जायेंगे
हम छोटे छोटे बच्चे कैसे स्कूल को जायेंगे ?!

और क्या होगा ?

खेतों के नन्हे पौधे भी सांस नहीं ले पायेंगे
सब्जी महंगी हो जायेगी फल थोडे से आयेंगे!

सारे बच्चे मिल कर

हम छोटे बच्चों की मानो थैला ले कर जाओ
या बाज़ार से कागज़ के थैले में सौदा लाओ

भैया पोली बैग नहीं कागज़ का थैला देना
अपनी धरती साफ़ रखेंगे मिल कर! बोलो! है ना!

Posted by on January 27, 2010.

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Categories: Environment, हिन्दी/Hindi Posts

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