A Nice Hindi Poem

Written by vik

Topics: हिन्दी/Hindi Posts

This Hindi poem is on love and the deeper meanings of it. This Hindi poem was posted in a popular online forum by some Praveen Sharma and it has been just published from there. The author of this poem is unknown or may be it is Praveen Sharma only who posted it.

मेरा हमसफ़र मेरा हमराज़ मिल गया है ……………

मेरा हमसफ़र मेरा हमराज़ मिल गया है ……………
अब ना रही हसरत इन निगाहों को किसी हसीन नज़ारे की
खुदा ने बक्शा जो हमसफ़र इतना खुबसूरत हमे
हर बात मे उनकी एक अजब सी कशिश है कि
हर रंग फीका लगने लगा उनके सामने हमे ………….
उनकी निगाहों मे मुझे मेरे खवाबों का जहाँ दिखता है
बहुत खुश किस्मत हो तुम शर्मा
झूठी चमक बिखरने वाले होते हैं बहुत
चमकता हो दिल भी जिसका
ऐसा हीरा मिला जो तुम्हे हर किसी को कहाँ मिलता है…………….
जिंदगी जो अभी तक लगती थी अधूरी
मानों उसे एक अंजाम मिल गया है
अँधेरी रात सा था हर लम्हा मानों
इस अमावस कि रात को उसका चाँद मिल गया है……………..
रूक सी गई थी सांसे थम सा गया था वक़्त
मेरे दिल कि धडकनों को गुनगुनाने के वास्ते
जैसे उसके सुरों का साज़ मिल गया है……………..
लम्बा है जिंदगी का सफ़र और तन्हा था मेरा ये मन
जिस साथ कि मुझे तलाश थी मुझे वो हाथ मिल गया है
बहुत खुश हूँ आज मै , बहुत खुश हूँ आज मै
कि मुझे मेरा हमसफ़र मेरा हमराज़ मिल गया है
मेरा हमसफ़र मेरा हमराज़ मिल गया है ……………

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5 Comments Comments For This Post I'd Love to Hear Yours!

  1. pranath says:

    ha! awesome

  2. jasmeet says:

    at last pyar ko pyar mil gaya.

  3. neena says:

    oh so nice

  4. sagnik banerjee says:

    awesome.

  5. santiti says:

    not sastisfied because udont give information on what v want u give something else i will never come on your site back again