Poem on Anna Hazare

The following Hindi poem on Anna Hazare has been written by JNU Student Rashwet Shrinkhal. The poem praises Anna Hazare and points out how the crusader is helping the nation. This poem was his response to a critical poem lampooning Anna Hazare on the net (Read the negative poem on Jairam Shukla’s blog) Excerpts: मैं सूर्य हूं, मैं ही उदय हूं | मैं शिवाजी की तलवार हूं | मंच पे सवार हूं
गांधी का लंगोट हूं | मैं आर्मी का फटा हुआ कोट हूं | मैं 121 करोड़ का ठेकेदार हूं, |मैं भले ही एक वोट हूं…

The poem below is Rashwet’s response to the aforesaid poem being circulated on the net (including on facebook). It is also a poem on Anna Hazare with a nationalistic viewpoint and has subtle commentaries on patriotism, nationalism, secularism, black money, corruption, jan lok pal etc. It will be a good poem/write-up for adults and kids looking for a poem/article/piece of writing on Anna Hazare or corruption. Feel free to share it if you like it or dislike it.

मैं अन्ना हूँ !
मैं बाबा हूँ !
मुझ पे इलज़ाम है कि मैं ,
राष्ट्रवाद का नया आयाम हूँ !
हाँ,
मैं राष्ट्रवाद हूँ !
टुकड़ों में बंटे राष्ट्र की,
एकता का नया संवाद हूँ ,
हाँ ,
मैं राष्ट्रवाद हूँ !
मैं भ्रस्टाचार   के खिलाफ हूँ ,
मैं हिन्दू , मुसलमान, सिख, इसाई ,
की गरीबी की आवाज हूँ ,
स्विस बैंक में बन्द
मैं देश का हिसाब हूँ,
हाँ ,
मैं राष्ट्रवाद हूँ !
मुझमे सिर्फ ‘गाँधी’ न देख ,
जरूरत पड़ी तो मै ‘आजाद’ हूँ,
हाँ,
मैं राष्ट्रवाद हूँ !
मैं ग्रामीण भी हूँ,
मैं शहरी भी हूँ,
मैं राष्ट्र का प्रहरी भी हूँ,
जनचेतना का शंखनाद हूँ,
हाँ,
मैं  राष्ट्रवाद हूँ !
मैं किसान की मेहनत हूँ,
मैं मजदूर का हाथ हूँ,
मैं मध्यवर्ग का आदर्श हूँ,
मैं टाटा-बिडला के सपनों का ‘विकास’ हूँ,
हाँ,
मैं राष्ट्रवाद हूँ !
मैं शिवाजी हूँ.,
मैं राणा प्रताप हूँ,
मैं हैदर हूँ,
मैं टीपू हूँ,
इस मिटटी से निकला ,
इस मिटटी के लिए मर गया ,
हाँ,
मैं राष्ट्रवाद हूँ !
मैं जहीर हूँ,
मैं  कलाम हूँ,
मैं बिश्मल्लाह , अब्दुल हमीद ,
मंच पे बैठे आमिर की गुहार हूँ,
जो बच गए वो ‘इकबाल’ हैं ,
अब उनके लिए काल हूँ,
हाँ,
मैं राष्ट्रवाद हूँ !
मैं राजबाला का बेटा हूँ,
मैं मोहन चंद  की विधवा हूँ,
मैं रम्या-विनीता की आहूति हूँ,
मैं उन्नीकृष्णन का बूढ़ा बाप हूँ,
हाँ
मैं राष्ट्रवाद हूँ!
आने वाला भारत कैसा हो,
इस सन्दर्भ में ,
मैं आज का आगाज हूँ,
कल को राष्ट्र सशक्त बने,
इसके लिए ,
मैं सिर्फ एक प्रयास हूँ,
हर वाद से विवाद के लिए तैयार हूँ,
हाँ,
मैं राष्ट्रवाद हूँ!
जब भी राष्ट्र आन्दोलन होता हैं,
राश्वेत ,
न जाने  क्यूँ एक ‘लीग’ अलग खड़ा होता हैं ,
रहे जिसे जहां खड़ा रहना ,
आज मैं गर्व से चीख चीख के कहता हूँ,
भारत माता का बेटा हूँ,
हर वाद से पहले राष्ट्रवाद की बात करता हूँ ,
हाँ,
मैं राष्ट्रवाद हूँ, मैं राष्ट्रवाद हूँ !

Copyright: राश्वेत श्रिंखल (2011) and Emotionally Speaking Blog. Feel free to share it.

2 Comments Comments For This Post I'd Love to Hear Yours!

  1. vijay says:

    very inspiring lines.

  2. Eoin says:

    It’s spooky how clever some ppl are. Thsakn!