Hindi poem on Holi

Written by vik

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This Hindi poem on Holi was written by Wasiul Haque. You can follow this link for the full poem: Holi ke rang. This was written by him as a song suitable for some Holi scene in a Hindi film.

जब हो मौसम ही क़िस्मत से इतना हसीं
क्या है अपना, बेगाना मेरे हम-नशीं
सारे रंगों को तू आज भूल जा
आजा होली के रंगों में डूब जा

खोई खोई है क्यों ऐसे बाली उमर
रंग ले, रंग ले तू रंगों में अपनी चुनर
रंग ही रंग उट्ठे जिधर ये नज़र
कोई थिरके इधर, कोई थिरके उधर
कोई मदहोश है तो कोई बेख़बर
मस्त है आसमां, मस्त है ये ज़मीं
जब हो मौसम ही क़िस्मत से इतना हसीं
क्या है अपना, बेगाना मेरे हम-नशीं
सारे रंगों को तू आज भूल जा
आजा होली के रंगों में डूब जा

 

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