Yoddha: Poem on India and Indian social condition

Written by vik

Topics: हिन्दी/Hindi Posts

Yoddha is a Hindi poem by Rashwet written in August 2012.  This is a poem with nationalistic fervour.  It will be of use for those looking for Hindi lines/slogans/poem on India, bravery, corruption, national pride. It is also suitable for recitation on Independence day or Republic day.

It roughly translates (first paragraph): Brave one! Do not let your blood calm down, the battle is yet to come.

योद्धा,
मद्धम न पड़ने दे ,
अपने रगों में दौड़ते लहू को,
कि समर अभी बाकी है I

योद्धा ,
न रख अपनी तलवार ,
पड़े न कमजोर कोई वार,
कि दुश्मन का शर अभी बाकी है I

योद्धा,
प्रलय की घड़ी है,
पतितों के मूठ में माँ भारती,
कि अस्मिता पड़ी है,
तू ही कृष्ण, तू ही भीम,
उठ जरा
कि दुशाशन की जांघ का टूटना अभी बाकी है I

योद्धा,
कहाँ है तू,
देख अपना राष्ट्र जल रहा,
सिक रही है सियासती रोटियां,
धर्मं, क्षेत्र, वर्ण, भाषा के लिए
इन्सान हर वक़्त लड़ रहा , डर रहा ,
यहाँ भूखा तेरी गली का हर बच्चा,
वहां गोरी चमरी वाला, अपना घर भर रहा,
बन कर मेघ , बरस तू आज ,
कि मही में नफरत के अंगारों का बुझना अभी बाकी है I

 

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