Aurat: Hindi poem on women in India

This Hindi poem on women’s plight was written in anger. It reflects the condition and anger after a number of rapes in India (December 2012 gang rape in Delhi, 5-year-old Gudiy rape case  and so many others). This poem is for anyone looking for a poem on women, the rape culture in India, the male psyche, the condition of society and anybody looking for a poem on women (aurat, mard), poem on women’s empowerment in India, hindi poem, slogan, rhymes on the girl child or women. There is a reference to a statement of MP Sharad Yadav in the poem (who said in Parliament that there was no boy in India who had not followed a girl). Text follows the image poem.  Written 21 April 2013. Title of poem is : Aurat.  Click on the image for a clearer view. 

vikas-gupta.in

मैं औरत हूँ
मैं खतरों से घिरी हूँ
मैं जंजालों में पड़ी हूँ
मत ये पूछो मुझसे कि
मैं किस तरह पली-बढ़ी हूँ

कदम-कदम पे, चप्पे-चप्पे पे
हर रास्ते पे, गली कूचों में
हर जगह ‘मर्द’ बैठे हैं
इन्तेजार में |
कि कब मैं वहाँ से गुजरूँ
और उनको रंगीन कर जाऊं
उनकी बोरियत भरी जिंदगी को
कुछ हसीन कर जाऊं |

उनको ये मजाक लगता है
औरत का पीछा करना,
‘रोमांस’ लगता है |
वो खुद ही कहते हैं कि
शायद कोई मर्द नहीं जिसने
औरत का पीछा न किया हो |

उन्हें एहसास ही नहीं
कि कोई औरत नहीं है देश में
जो कभी सुकून से जी सकी हो —
रास्तों में अकेले चलते हुए
चैन की सांस ले घूम सकी हो
ट्रेन, बस या चौराहों में
मर्दों की तरह बेफिक्र रह सकी हो |

बहुत कुछ होता है एक औरत में
सिर्फ शरीर और मांस नहीं होता
औरत को देख के लार टपकाना,
पीछा करना रोमांस नहीं होता |

हर वक़्त उसे डर है
खतरा उसके चारों ओर है
जाने कब कौन खुद को उसपे थोप देगा
फिर गला घोंट देगा
या फिर छलनी कर के
कंक्रीट के जंगलों में बुत बने
इंसानों के समाज को सौंप देगा |

पांच साल की बच्ची हो या
अस्सी साल की बुढिया
मर्द कर रहे हैं सबका शिकार
कहीं मार रहे हैं सीटी
कही कर रहे बलात्कार |

औरतों का जीवन नरक कर दिया है
ये कौन सा समाज बना रहे हैं हम
सुधारो खुद को, थोड़ा तो सोचो
और आँख नहीं खुल रही हो
तो अपनी माँ-बहन से पूछो |

7 Comments Comments For This Post I'd Love to Hear Yours!

  1. ojasvi yadav says:

    aise poems aur likhne chaiye taki log aur apni neendon se udh sakein

  2. its seriously very nice and true line said for womens.

    people ke paate jaisa na bane jo waqt aane pe
    sukh ke ghir jate hai banana hai toh
    mehndi ke pato jaisa bano jo
    khud pis kr bhi dusaro ke zindgai mein rang bar dete hai

  3. its seriously very nice and true line said for womens.

  4. afghjk says:

    its a cheap poem very cheap
    cheeeeeeeeeeeeeeeeeeeee

  5. mohit says:

    Grand salute vikas bhai !

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