A Hindi poem on life.

Written by vik

Topics: हिन्दी/Hindi Posts

A nice Hindi poem on life, humour in life, zindagi.

रुई का गद्दा बेच कर, मैंने इक दरी खरीद ली।

ख्वाहिशों को कुछ कम किया मैंने, और ख़ुशी खरीद ली ।

सबने ख़रीदा सोना, मैने इक सुई खरीद ली, सपनो को बुनने जितनी, डोरी ख़रीद ली ।

मेरी एक खवाहिश मुझसे, मेरे दोस्त ने खरीद ली, फिर उसकी हंसी से मैंने अपनी कुछ और ख़ुशी खरीद ली ।

इस ज़माने से सौदा कर, एक ज़िन्दगी खरीद ली, दिनों को बेचा और, शामें खरीद ली।

शौक-ए-ज़िन्दगी कमतर से, और कुछ कम किये, फ़िर सस्ते में ही, सुकून-ए-ज़िंदगी खरीद ली !

From the web, author unknown.

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  1. ravi says:

    nice its really touching,Thanks!