Bijli Bachao- Hindi poem on saving electricity and power.

Written by vik

Topics: हिन्दी/Hindi Posts

This Hindi poem on saving power or energy or electricity was written for a kid in October 2014. It would be useful for those looking for rhymes, slogans, poems on environment, waste mangement, saving energy, saving electricty, saving planet earth, curbing pollution, saving nature and forests.  Poem copyrighted to Vikas.

Roughly speaking the poem exhorts people that we are responsible for the decay of environment and we must do the amendments now.

मम्मी-पापा, भैया-दीदी
मौसा-मौसी, दादा-नानी
बिजली हमें बचानी है
नहीं करनी अब आनाकानी |

ऊर्जा बहुत अनमोल है
बिजली हमें बचानी है
प्रदुषण, गन्दगी जो फैली है
उसके पीछे भी कहानी है|

और उस कहानी के लिए
हम सब जिम्मेवार हैं
आराम का लालच है हमें
प्रकृति बन गयी व्यापार है !

आपको ये लगता होगा
कि घर से प्रदुषण होता नहीं
पर जानो कि बिजली के पीछे
अक्सर धुंआ हो रहा कहीं !

बिजली जो झट मिलती है
स्विच ऑन करते आती है
पर पॉवर प्लांट में कोयला जलता
तभी घरों में जाती है !

ये धुंआ, ये काला जहर
हर जगह देखो फैला है
स्वच्छ भारत कैसे बनेगा
जबतक इतना मैला है !

चौबीस घंटे हम सब सारे
कितनी बिजली जलाते हैं
तरह-तरह के उपकरण चलाते
बिजली गुल हो, तो घबराते हैं !

हमारी रोज की जिंदगी में
बिजली हम बर्बाद करते हैं
कंप्यूटर, लाइट, म्यूजिक सिस्टम
से ही चिपके रहते हैं !

और दिवाली, दशहरा में पूछो मत
कितनी बर्बादी होती है
गांव की जनता बिजली के बिन
अन्धकार में सोती है !

बिजली की बचत जरूरी है
यदि जीवन सही चलाना है
ऊर्जा के हरित स्रोत चाहिए
धरती को यदि बचाना है |

तो आज से सब ठान लो कि
बिजली हम बचाएंगे
जितना काम हो उतनी जलाओ
इसे व्यर्थ न गवाएंगे |

एक ही घर में दर्जनों AC की
नहीं कोई जरूरत है
दिखावे भरे इस जीवन से
बदहाल देश की सूरत है !

जब काम नहीं किसी यन्त्र का
तो उसको ऑफ कर दो भाई
और बिजली बचाने के लिए
खुद को दो तुम बधाई !

अंकल, टीचर, भैया-दीदी
देखो प्रकृति खस्ताहाल है
पेड़-पौधे, पहाड़, नदी, जंगल
सबका बुरा हाल है !

मोदी जी ने बात कही है
कि ‘स्वच्छ भारत’ बनाना है
तो सफाई रखो और उर्जा बचाओ
यदि धरती को बचाना है !

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