खुल जाए बचपन – Hindi Poem on Parenting

Written by vik

Topics: हिन्दी/Hindi Posts

This is a Hindi poem on Parenting: how parents can help improve the childhood of kids by being nice to their kids. Parents are often officious and authoritative which hampers childhood. This poem contends that parents have to believe in the principle of buddy parenting; think of your role as also of being friends to your kids, do not just instruct them but help them learn things and often learn with them.

 

हर पल खुशी के बन जाए

जो माँ-बाप दोस्त हो जाएँ

जो साथ-साथ सब सीखलाएं

न कि बस हुकुम जताएं !

 

बचपन हो जाता है बेहतर

बच्चों से घुल-मिल लें आप

उनके संग खेले-कूदें, सीखें

छोटी-मोटी गलतियां करें माफ |

 

खुल जाए बचपन उनका

यदि आप भी बच्चे बन जाए

उम्र के बोझ को किनारे कर के

संग उनके आप खिलखिलाएं |

 

बच्चों को सब सीखाइये

पर कभी मत गुस्साइये

साथ हंसिये, हंसाइये

और खूब बतियाइये |

 

उनका बचपन निखारना हो

उनका जीवन सवारना हो

तो साथ सीखिए और सीखाइये

खडूस मास्टर सा मत बन जाइए |

 

‘खुल जाए बचपन’ हर बच्चे का

माँ बाप यदि बस खुल जाएँ

बच्चों को खूब प्यार करें और

लाड-दुलार से सीखलायें |

 

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