Hindi poem on state election results 2017

Written by vik

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This is a poem inspired by the state assembly election results today in the five states. The poem touches upon demonetisation, rise of PM Modi, fall of Kejriwal and Congress, plight of Irom Sharmila and other issues arising from electoral politics.

राज्यों में चुनाव के परिणाम आये
बहुतों को हंसाये, कुछ को रुलाये |
कमल खिला, साइकिल पंक्चर
झाड़ू बिखरा, हाथ में फ्रैक्चर |

खुल गयी बहुतों की पोल
कुछ का तो फट गया ढोल |
उत्तर प्रदेश तो हो गया भगवा
सपा-कांग्रेस को मार गया लकवा |

नोटबंदी का सारा बवाल
भाजपा को कर गया मालामाल |
एटीएम की लाइन में लग के
धूप और बारिश में पक के
एक-एक नोट के लिए खाए धक्के
और दिए वोट भाजपा को छक के |

समीक्षा, आकलन सब फेल हुआ
सब बौने हुए, मोदी व्हेल हुआ
भले पंजाब में मुह की खायी
बुरे थे इनके अकाली भाई |

उत्तराखंड में रावत सरकार
का ख़त्म हुआ सारा व्यापार
केजरीवाल को पडी भारी मार
बचे खुचे अब दिन हैं चार |

सोलह साल उपवास रखी थी
अफ्स्पा पे बात रखी थी
फिर भी मणिपुर में वो हारी
जनता बस चाहे दुखियारी |

ये भारत देश महान है
यहाँ मंझा हर इंसान है
वोट इनकी आवाज है
जिसमे दबा कुछ राज है

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Author, Copyright- Vikas.

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